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નવરાત્રી ની કથા

નવરાત્રી આવી ગઈ છ. હું બવજ ખુશ છું.નવી નવી હાડીઓ પહેરીને તૈયાર થવા મળશે પણ સાલુ આ હાડી પહેરીને તૈયાર થવા ઘણો ટેમ લાગસ.વળી આ બંગડીઓ ને બઘું પહેરવા બહુ ટેમ લાગસ. બધું પહેરી ને કાઢવા ઘણો ટેમ જાસ. પાછા રમી રમી ને ટાંટીયા દુખી જાસ. હાલુ મને આ હવાલ પડછ કે બધા ઘરનું કામ કેવી રીતે કરસ? જ્યારે જુઓ ત્યારે ઘરની બહાર જ જાયસ. નવા નવા લુગડાં પહેરીને ફોટો પાડતા દેખાય છ. હાળુ એમના ઘરવાળા કઇ બોલતા નથ? એમનું કામ કોણ કરસ? બહુ શક્તિશાળી લાગસ બધા બૈરા. હું જ એક મુઈ થાકી જઉસ. સવારે આરતી મા જઈ આઈ તો ઉભા રહી ને પગ દુખી ગયા. અડધો કલાક ઉઘી ત્યારે રસોઈ કરવા ટાંટિયા મા જોર આવ્યુ. માંડ માંડ થોડો આરામ કર્યો ત્યાં હાંજે રસોઈ નો ટેમ થયો. એ પતાવ્યુ તો ગરબા રમવા નો ટેમ થયો. સૌથી છેલ્લે પહોચી તો માળા બધા બૈરા તૈયાર થઈ ને ગરબા રમતા તા બોલો! માતાજી મને પણ શકિત આપને હું બધે પહોંચી વળુ.  જો તમારી હારે વાતોમાં બહુ ટેમ થયો. આજે પણ હું મોડી પડી.એ હાલો ગરબા રમવા 💃💃

प्लास्टिक का उपयोग कम कीजिए और समुंदर को प्रदुषित होने से बचाइए।

आजकल बच्चे हो या बड़े, गर्मी के मौसम में सभी को समुंदर किनारे टहलना और समुंदर की लहरों के साथ खेलना बहुत अच्छा लगता है। सिर्फ अपनी मौज मस्ती के लिए है लोग वहाॅं जाते हैं, और खा पीकर पानी की खाली बोतल या नाश्ते की प्लास्टिक बैग ऐसे ही ऐसे ही समुंदर किनारे फेंक देते हैं जिसके कारण जल प्रदूषण होता है। समुंदर में रहने वाले अनेक जीवो को हानी होती है। यहाॅं तक कि उनकी जान भी चली जाती है। उन निर्दोष जानो को पता नहीं होता कि वह चीज उनके लिए हानिकारक है। खाना समझ कर वह अपने मुॅंह में डालते हैं और फिर उसके जहर से घुट कर मर जाते हैं समुद्र जो अनेक जलचर जीवों का निवास स्थान है ,जहाॅं से हमें नमक मिलता है, क्या उसकी सलामती की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं? क्यों हम हमारी नैसर्गिक सॅंपत्ति को प्रदूषित कर रहे हैं? प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग से सबसे ज्यादा नुकसान तो मानव जाति का ही हो रहा है पर यह बात हमें अभी तक समझ में नहीं आ रही और हम अपने साथ-साथ पर्यावरण का भी नुकसान कर रहे हैं । हमें जब भी हम वहाॅं जाए तो प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना है और हमारा जो भी खाने पीने का सामान या कचरा हो, उसे यहाॅं वहाॅं...

खुद की कदर करना सीखो

 हम अपने परिवार और अपने आसपास के लोगों को महत्व देते हैं, लेकिन हम अपने बारे में भूल जाते हैं, या इससे भी बदतर, हम अपने बारे में बिल्कुल नहीं सोचते हैं। जब हमें अपमान का सामना करना पड़ता है, तो हम बहुत बुरा महसूस करते हैं जिसके लिए हम ही दोषी होते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम खुद को महत्व दें। हमें अपनी पसंद-नापसंद, अपने सपने, अपनी ताकत और कमियों पर विचार करना चाहिए और इन सभी चीजों पर चिंतन करने के लिए समय निकालना चाहिए। हर दिन, हमें अपने उद्देश्यों के करीब जाना चाहिए और वह करना चाहिए जो हमें अच्छा लगता है। हमें अपनी विशेषताओं के बारे में पता होना चाहिए। हमें अपने विशेषज्ञता के क्षेत्र पर अधिक ध्यान देने और इसे अद्यतित रखने की आवश्यकता है। हमें यह याद रखना चाहिए कि कभी-कभी केवल अपने लिए जीना आवश्यक होता है।

महात्मा

आसान होता है दुनिया से लड़ना, मुश्किल होता है खुद से लड़ना। इसीलिए जो खुद को जीत लेता है, वो महावीर कहलाता है। काम क्रोध मोह माया, आसान नहीं इनसे बच पाना। भौतिक सुखों से परे होकर, भीतर की और जो झाॅंकता है। सच्चे सुख की प्राप्ति के लिए, नश्वर सुखों को जो त्यागता है, वो होता है सच्चा महात्मा...! इसीलिए कहा जाता है कि, जिसने मन को साध लिया, उसने सब कुछ जीत लिया।

मन

मन है चंचल, भटकता पल पल। फिरता यहाॅं वहाॅं, मिले बसेरा जहाॅं । लक्ष्य से भटकाता कभी, काॅंटा बनकर सताता कभी। अपनों से दूर ले जाता कभी, उलझने पैदा करता ये कभी। ख्वाहिशों का है ये स्थान, जो करवाता कभी अपमान। जिसने मन को साधा, उसने पाया सम्मान। इच्छाओं पर काबू पाकर, दर्द से मुक्ति पाई उसने। अपने मन को साधकर, परम शांति पाई उसने।

LOVE IS SPECIAL

Love is special because  it is the hope of the heart Which becomes the rope  for a fresh start One has a dream,  without which life is incomplete And love supports us  to accomplish that. Love is special because  it teaches dedication Which removes our frustration. Love is special because  it makes us perfect partners With which  our bond becomes stronger We ignore vulnerabilities  And focus more on strength It brings us closer Which is our most important asset.

स्कूल जाने वाले बच्चों पर सामाजिक माध्यम का प्रभाव

स्कूल जाने वाले बच्चे सामाजिक माध्यम के  दिन ब दिन बढ़ते उपयोग के कारण आधुनिकता की दौड़ में लगे हुए हैं ।अपने संस्कार, काबिलियत, कर्तव्य इन सब को भुलाकर बस भौतिक सुख सामग्री के पीछे आकर्षित हो रहे हैं । पढ़ाई की उम्र में घूमना, खरीदारी करना, पिक्चर देखना, पार्लर जाना ये सब शौख पाल रहे हैं । उन्हें अपने भविष्य की कोई चिंता नहीं। अपने माॅं-बाप के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं, बस उन्हें अपने वर्तमान के आनंद की पड़ी होती है। यह सब कुछ सिर्फ और सिर्फ सामाजिक माध्यम के बढ़ते उपयोग के कारण हो रहा है और ऊपर से ऑनलाइन क्लासेस ने उनको और खुला मैदान दे दिया। आज की युवा पीढ़ी आधुनिकता की दौड़ में ऐसी फॅंसी है कि अब तो कोई चमत्कार ही उनको बचा सकता है।

सर्दियों के मौसम की यादें

हर साल सर्दियों में हम घूमने का आयोजन करते हैं वैसे ही २०१७ में हम शिमला, कुलू, मनाली गए थे। हमारे जीवन की  वो सबसे यादगार और बेहतरीन यात्रा थी।  वहाॅं चारों और छाई प्रकृति की सुंदरता, हरियाली, ऊॅंचे ऊॅंचे पेड़, शांति और मनमोहक वातावरण ने  हमारा दिल जीत लिया था।  सर्दियों में घूमने का मजा ही कुछ और होता है । हम बहुत घूमे पर फिर भी हमें थकान नहीं लग रही थी और हमारा मन भी नहीं भर रहा था। इस सफर से मुझे बहुत कुछ सीखने मिला ।जिस शांति को हम चीजों में तराशते हैं, वो हमारे सामने है, प्रकृति के रूप में...! बस उसके साथ कुछ पल गुजारेंगे तो हमें जो असीम आनंद मिलेगा, उसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते...!

हवा

शीतल हवा का झोंका सभी को पसंद होता है, क्योंकि वह सुकून देता है। हमारे मूड को तरोताजा करता है। इस हवा के झोंके जैसे कुछ इंसान होते हैं, जिनके आने से हमारे जीवन में खुशियों की लहर छा जाती है। ऐसे इंसान गम की गर्मी को भगाकर शीतलता की छाॅंव ले आते हैं। पर गर्म और खुश्क हवा जैसे कुछ इंसान अपने साथ साथ हमारे जीवन में भी परेशानी ले आते हैं । हमें हमेशा ये याद रखना है कि शीतल हवा का झोंका ही सबको पसंद आता है, और इसीलिए हमें खुद को हमेशा शांत, प्रसन्नता फैलाने वाला इंसान बनाना है, ना कि गर्म  मिजाज और कठोर स्वभाव वाला इंसान...! हमें हमेशा एक ही चीज याद रखनी है, जो हमें पसंद है, वही हमें बनना है। Beena Shah Instagram I'd beena_shah74 @⁨Archisman Satpaty⁩ @⁨✨ Author Naaz Nayim ✨⁩ @⁨Riya Gupta⁩

હું કેમ લખું છું ...???

મારે લેખક બનવું છે એટલા માટે કે મને લખવું ગમે છે. મારા મનની વાતો હું આ માધ્યમ દ્વારા બધા સુધી પહોંચાડી શકું છું. બોલતી વખતે હું ભાવનાશીલ થઈ જાઉં છું, પણ લખતી વખતે મારી સાથે એવું નથી થતું...! હું લખવા માટે પેન હાથમાં લઉં એટલે સતત મને ઘણા બધા વિચારો ઘેરી વળે છે... શું લખવું અને શું ન લખવું એની દ્વિધામાં અટવાયેલી રહું છું. મને ઘણું બધું બોલવું છે, સાંભળવું છે, લખવું છે...! નાનપણથી મને લખવા વાંચવા નો શોખ છે, આ મારું ગમતું કામ છે. હું લખવા માટે પેન હાથમાં લઉં, ત્યારે ઘણા બધા વિચારો મને ઘેરી વળે છે... એમ થાય છે કે હું સતત લખતી જ રહું... લખતા લખતા હું મારા મનના ઉંડાણમાં ડૂબી જાઉં છું. દરેક વિષય પર ઘણું બધું લખી શકું છું. મારા વિચારો પ્રગટ કરવા માંગુ છું, આખા સમાજ સામે હું મારા વિચારો લાવવા માંગું છું... લેખન એક એવું કાર્ય છે જે દ્વારા પોતાના મનની વાતો વાંચી સાંભળી ને ઘણા લોકોને અનુભવ મળે, માર્ગદર્શન મળે, પ્રેરણા મળે, કોઈકને જીવવા માટેનું બળ મળે... મને આ લેખન દ્વારા પોતાના જ મનના ઊંડાણમાં ખોવાઈ જવું છે, પોતાની જાતને શોધવી છે અને પોતાનું એક સ્વતંત્ર વ્યક્તિત્વ ઉભું કરવું છે...

होली

रंग बरस रहे हैं तरह-तरह के, होली खेलने जन मन तरसे । दिलों को करीब  लाने वाला, पावन यह त्यौहार जो है...! लाल रंग लाता खुशियों को, बढ़ाता प्रेम और समृद्धि को । पीला रंग ज्ञान का है सूचक, अंतर्मन की बढ़ाता चमक । हरा रंग ऑंखों को भाता, गर्मी में शीतलता लाता । गुलाबी रंग से खुशियाॅं छाती, तन मन में प्रसन्नता छाती । नीला हो या केसरी, काला हो या बैंगनी । चाहे हो कोई और रंग, बढ़ाते सब के दिलों में एक नई उमंग...!!!

धन्य हो तुम...!!!

सुरक्षा करते हैं जो देश की, लगाते हैं बाजी अपनी जान की। भूल जाते हैं बाकी सब कुछ, याद रखते हैं बस अपने वतन की । परिवार को अपने भूलकर, सारे देश को ही अपना मान लेते हैं । उसकी सुरक्षा की खातिर, जी जान लगा देते हैं । सिर्फ सैनिक नहीं है वो, वो तो हमारी शान है । जिनकी वजह से हम चैन से जी रहे हैं, हमारा वह सम्मान है । दिन-रात लड़ते हैं जो, हर कमी को सहते हैं वो । आंधी हो या तूफान, करते हैं वो सब का सामना । जब तक दुश्मन से लड़ न लें, चैन से नहीं है उन्हें बैठना । मेरे देश के वीर सैनिकों, देश की जान हो तुम । नतमस्तक होकर वंदन करती हूं तुम्हें , धन्य हो तुम ,धन्य हो तुम....!!!

why ???

We measure people not by their thoughts and qualities, but by their appearance, outward personality and intelligence.  In doing so we do not think about the spirit of it.  Like a thing we understand its value, but we forget that it is also a human being like us.  They also have feelings of joy, sorrow, anticipation and appreciation.  Why don't we accept them?  Why don't we try to see the qualities in every person ???

पाॅंच बेहतरीन भेंट अपने पोते पोतीयो के लिए

हर दादा दादी अपने पोते पोतियो को दिलों जान से चाहते हैं और उन्हें वह देना चाहते हैं, जो उन को सबसे ज्यादा काम आए । आइए जानते हैं ऐसे पाॅंच यादगार तोहफे जो आप अपने पोते पोतियो को दे सकते हैं...! (१) अपने परिवार के पिछली पीढ़ी की कहानियों को और किस्सों को अपनी आवाज में रिकॉर्ड करके उन्हें सुनाइए ताकि वह भी जाने उनके पुरखे कौन थे, कैसे थे और क्या करते थे साथ ही में उनको अपने कुटुंब के लिए किए हुए त्याग के बारे में भी बताइए जिससे उनके छोटे से दिमाग में अच्छे विचार के बीच अपना बसेरा कर लेंगे । (२) अपनी पुश्तैनी हवेली या घर दिखाने उन्हें गाॅंव ले जाइए । इससे उन्हें गाॅंव के जीवन का भी अंदाजा होगा और जिंदगी की सच्चाई को वह करीब से देखना सीखेंगे और परिश्रम करके आगे बढ़ना सीखेंगे । (३) आप जिस भगवान को मानते हैं उनके मंदिर की यात्रा पर उन्हें साथ ले जाइए इससे उनमें भी भक्ति भाव बढ़ेगा। (४) उन्हें परिवार के सभी सदस्यों की तस्वीर, नाम ,जन्म तारीख वगैरह की सूचना से भरा एक कैलेंडर भेट में दीजिए। (५) नए साल की शुरुआत मुस्कान बाॅंटकर करना सिखाइए, मतलब उन्हें अनाथ आश्रम ले जाइए वहाॅं उनके हाथों से बच्च...

नए साल की शाम हमें क्या खाना चाहिए...???

नए साल की शाम के लिए सभी उत्साहित होते हैं, और देर रात तक जागकर नए साल का स्वागत करना चाहते हैं, ऐसे में कौन सा खाना हमारे लिए अच्छा होता है, आइए जानते हैं... (१) हमें ऐसा खाना खाना है जो सुपाच्य हो, जिसमें कम कैलरी हो और हमें बहुत भारीपन भी ना लगे क्योंकि इससे हमारी सेहत बिगड़ सकती है । नए साल की शुरुआत हमें तरोताजा होकर करनी है, ना कि बीमार चेहरा लेकर पूरा दिन लेटे रहना है । (२) अगर हम सुप  और सेलड़ ज्यादा लेंगे तो हमारा वजन भी नियंत्रित रहेगा। हम जितना चाहे उतना खा सकते हैं, कोई दिक्कत भी नहीं होगी और हम हल्का महसूस करेंगे । (३)घर के बने खाने से बेहतर और कुछ हो ही नहीं सकता। रोटी, सब्जी, दाल ,चावल इसमें हमें पूर्ण पोषण मिलता है और संतुष्टि भी मिलती है।  हमें सिर्फ यह याद रखना है कि हम पोषण के लिए खाना खा रहे हैं ना कि स्वाद के लिए ... और हमारी सेहत हमारे लिए सबसे ज्यादा जरूरी है ।

शाम

ऐ शाम धीरे-धीरे गुजर, थोड़ा ठहरने दे मुझे इन पलों में । भूल जाने दे मुझे मेरे सारे काम, आज का यह वक्त करूॅंगी मै बस तुम्हारे ही नाम । तुम्हारी सुंदरता लुभाती है मुझे, हर पल सब कुछ भुलाती है मुझे।  क्यों खींचती हो मुझे तुम्हारी ओर, कि सुनाई ही नहीं देता मुझे किसी का शोर..?  डूबना चाहती हुॅं मैं तुम्हारी निगाहों में, कभी तो भर लो मुझे अपनी बाहों में । यह जीवन का कोई भरोसा भी तो नहीं, कब बुलावा आ जाए मौत का पता ही नहीं । इसीलिए कहती हूं...   ऐ शाम धीरे-धीरे गुजर, जी लेने दे मुझे यह पल ।

चार बेहतरीन क्रिसमस भेंट जो आप खुद को दे सकते हैं

हम अक्सर दूसरों को भेंट देने के बारे में सोचते हैं पर कभी हमने खुद के बारे में सोचा है ? आइए आज सोचते हैं क्रिसमस छुट्टियों में हम अपने आपको क्या भेंट दे सकते हैं...? (१) हमें अपना सारा समय सिर्फ खुद के लिए देना है, अपने अंदर झाॅंकना है कि हमें क्या चाहिए, हमारे सपने क्या है...! क्या हम हमारी जिंदगी से खुश हैं ? हमारी क्या कमजोरियां हैं जिसे हम सुधारना चाहते हैं । छोटे-मोटे लक्ष्य तै करने है। (२) जो जगह हमें पसंद है वहाॅं जाना है। हमें जो अच्छा लगे वह करना है, फिर चाहे वह समुंदर किनारे बैठना हो ,किताब पढ़ना हो ,गाना गाना हो या खरीदारी करनी हो । (३) सकारात्मक विचारों वाले लोगों से मिलना है, हमारी सकारात्मकता बढ़ाए ऐसी किताबें पढ़नी है । नए नए दोस्त बनाने हैं जो हमें अपने नए रूप से मिलवाए । (४) अपने मन की सारी बातें एक डायरी में नोट करनी है और उन यादों को लिखना है जो हमें खुशियाॅं देती है। बार बार उन पलों को याद करना है जो हमारे चेहरे पर मुस्कान ले आते हैं । यकीन मानिए इससे बेहतर क्रिसमस भेंट आपके लिए हो ही नहीं सकती...!!!

अदृश्य प्रेम पत्र

कभी पढ़ लेते मेरी ऑंख, तो पढ़ पाते मेरा वो अदृश्य प्रेम पत्र... जो तुम्हारे लिए मेरी ऑंखों से लिखा गया था । कभी समझ पाते मेरे दिल के एहसास, तो ले पाते महेक मेरे अदृश्य प्रेम पत्र के जज्बातों की... जो दिल के उद्यान में सिर्फ तुम्हारे लिए खिलते थे । कभी देखते मेरी और प्यार से, तो समझ पाते मेरा वह अदृश्य प्रेम पत्र का प्यार... जो सिर्फ तुम्हारे लिए था । कभी मेरे बारे में दिन रात सोचते, तो समझ पाते कि... यह अदृश्य प्रेम पत्र का जिक्र, सिर्फ तुम्हारे लिए था, है और रहेगा...!!!

प्रकृति माॅं

सुबह का सूरज हो या संध्या की लाली, प्रकृति माॅं की सुंदरता की बात ही है निराली । पक्षियों का गीत हो या झरनों का संगीत, मन को प्रसन्नता बाॅंटती प्रकृति माॅं की हर रीत । चॅंचल बहती नदी हो या समुंदर तूफानी, अशांति से शांति की तरफ बढ़ती हमारी जिंदगानी । पेड़ पौधे हो या फूल, पर्वत हो या बादल, बढ़ाते रहते  हैं  जीवन में सदैव आनंद मंगल । खुला आसमान हो और चाॅंद सितारों का साथ हो, चाॅंदनी रात के उन सपनों सी कोई न दूजी सौगात हो ...!

सर्दियों में खुद को व्यस्त रखने के १० तरीके

सर्दियों का मौसम सबको प्यारा होता है। सर्दियों में हमें ऐसा कुछ करना है जो पूरे साल हमें उर्जित भी रखे और स्वस्थ भी। आइए जानते हैं वह आसान अलग अलग तरीके जिनके जरिए हम सर्दियों के दिनों का भरपूर फायदा उठा सकते हैं । (१) सुबह की सैर हमें जरूर करनी चाहिए, इससे हमें शुद्ध प्राणवायु भी मिलेगा और हमारा स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा । जहां सूर्य की रौशनी हम पर ज्यादा पड़े वहां हमें ज्यादा टहलना चाहिए । (२) सूर्य नमस्कार और योगा करना चाहिए इससे हमारी रोगप्रतिकारक शक्ति भी बढ़ती है। (३) अगर हम दौड़ सकते हैं तो हमें जरूर दौड़ना चाहिए इससे हमारे शरीर में उष्णता पैदा होती है और हम ठंडी से बच पाते हैं। (४) साइकलिंग एक बहुत अच्छा व्यायाम है जिससे हमारा तन फुर्तीला और स्वस्थ बनता है। (५) अगर हमें घूमने का शौक है तो हमें ट्रैकिंग पर जरूर जाना चाहिए इससे हमें नई नई जगह भी देखने मिलती है और हमारी नए नए लोगों से पहचान भी होती है । (६) बाजार में उपलब्ध सारी सब्जियाॅं और फल की खरीददारी करके उनका इस्तेमाल करना चाहिए और उससे तरह-तरह के व्यंजन बनाने चाहिए जिससे परिवार में सबकी सेहत बनी रहे । (७) सब्जियों का गर्...