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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस

सुभाष चंद्र बोस एक ऐसे क्रांतिकारी थे, जिनका नाम बड़े आदर के साथ इतिहास के पन्नों पर अंकित है । एक ऐसे क्रांतिकारी जिन्हें युवान अपना आदर्श मानते थे ।खुशी-खुशी उनके लिए अपना लहू बहाने तैयार रहते थे ।अपने मातृभूमि को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराने के लिए जिन्होंने आजाद हिंद फौज की स्थापना की थी । उन्होंने देश बंधु चितरंजन दास के साथ काम किया। अपने जीवन काल में जो ग्यारह बार जेल भी गए ।भगत सिंह को फांसी की सजा ना मिले इसके लिए लड़ने वाले वह एकमात्र व्यक्ति थे । जब उनके विचार किसी के साथ ना मिलते थे वो वहां से हट जाते थे ।पर उन्होंने देश को आज़ादी दिलाने के लिए युवानों को जागृत किया उन्हें मंत्र दिया ,तुम मुझे खून दो, मै तुम्हें आज़ादी दूंगा ।ऐसे महान क्रांतिकारी की मृत्यु संशायास्पद तरीके से हुई, जिसका अभी तक रहस्य बना हुआ है ।

आत्मविश्वास

जहां खुद की काबिलियत पर यकीन होता है, वहां आत्मविश्वास होता है और जहां आत्मविश्वास होता है, वहां सफलता के लिए कोई आशंका नहीं रहती । पर जब खुद के बारे में ही कोई अनजान हो तब उसका आत्मविश्वास बढ़ता है, सच्ची दिशा में किए गए प्रयासों से, और सच्ची प्रशंसा से...! मतलब कि जब कोई हमारा हौसला बढ़ाता है तो हमारा आत्मविश्वास भी खुद ब खुद बढ़ने लगता है । जब आत्मविश्वास बढ़ता है तो हमें हमारी मंजिल तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता । एक आत्मविश्वास के दम पर किए गए फैसले जीवन बदल सकते हैं और गलत निर्णय लेने पर हमें तबाह भी कर सकते हैं ।

नीम का पेड़

नीम के पेड़ को जीवनदायिनी माना जाता है । नीम का पेड़ हवा शुद्ध करता है और अन्य पेड़ों की तुलना में अधिक ऑक्सीजन भी पैदा करता है । प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में भी नीम के पेड़ का सबसे अहम योगदान होता है । नीम के पेड़ का हर एक हिस्सा औषधीय गुणों से भरपूर है और इसीलिए इसे संजीवनी भी कहा जाए तो गलत नहीं होगा । ऐसा कहा जाता है कि नीम के *पेड़ के नीचे जो थोड़ी देर बैठता है या सोता है उसे अधिक मात्रा में प्राण वायु मिलने लगता है और उसका आरोग्य भी बहुत अच्छा हो जाता है । अगर किसी रोगी को नीम के पेड़ के नीचे सुलाया जाए तो वह भी निरोगी हो जाता है । उसकी कड़वी गंध के कारण कीटाणु और जीवजंतु उससे दूर ही रहते हैं , इसीलिए कभी किसी *पेड़ के नीचे बैठने* की इच्छा हो तो जरूर नीम के पेड़ के नीचे ही बैठना । वह चमत्कारिक फायदे मिलेंगे जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते ...!

'नारी तेरे रूप अनेक ''

'नारी 'शब्द  शक्ति का प्रतीक  है ,और नारी को अपने जीवन में कई रूप लेने पड़ते है और वह ये सभी रूप अच्छी तरह से निभाती है। नारी से ही ये संसार चक्र आगे बढ़ता है। नारी ईश्वर का वरदान है ,जो हमें महानता  का ज्ञान देती है। अगर नारी न होती तो कुछ भी न होता। प्यार और बलिदान का दूसरा रूप 'नारी' है।         नारी जब पुत्री के रूप में जन्म लेती है ,तो माता पिता के जीवनमे खुशियाँ  भर देती है। अपनी चहक से घर आँगन को महका देती है। जब विदा होकर ससुराल जाती है तो वहाँ  पर भी सबको सहजतासे अपना लेती है। अपना घर-बार,  माता -पिता सबको भुलाकर सास ससुर  को ही अपने माता पिता का दर्जा देती है और गृहलक्ष्मी  बनकर अपने कर्त्तव्य का पालन करती है। पत्नी  के रूपमे  वह पति को एवं  उसके परिवार के सदस्योंको ,उनके गुण -दोषो  सहित अपनाती है। उनकी पसंद -नापसंद का ख्याल रखती है। नारी में ही वह शक्ति है  जो हर नए रूप में अपनेआपको आसानी से ढाल सकती है। नारी का सर्वश्रेष्ठ  रूप ''मातृत्व'' का है। नौ मह...

दिल

दिलने मान लिया है या तो सबने मुझसे ये मनवा लिया है कि तुम हो ! यहीं कहीं-----! इसीलिए तो ये दीवाना दिल तुम्हे कोई  आशिक़ के रूप में ढूँढ  रहा है कि  कभी तो धीरे धीरे से तुम मेरी ज़िन्दगीमें आओगे ,दिल को चुराकर मनमें समाओगे !तब बहारों से मै  कहूँगी कि  बहारों फूल बरसाओ,मेरा महबूब आया है।  जब तुम मुझे पहलीबार मिलोगे  तो मै  यही  गाऊँगी  कि कौन हो तुम जो दिल में समाए  जाते हो ,अभी से  तो ये धड़कन मेरे दिलकी तुमसे ये कहती है ---!कि  तुम क्या मिले जानेजाँ , प्यार ज़िन्दगी से हो गया !         फिलहाल तो लाखो है निगाहोंमें ,ज़िन्दगी की राहोंमें -----पर फिर भी किसी हसींन यार की तलाश है।  क्या तुम ये नहीं मानते हो ?'सांसो की जरुरत है जैसे  जिंदगी के लिए ! सागर किनारे मेरा दिल यही गा  रहा है कि ''तू जो नहीं तो मेरा कोई नहीं है  !''         ओ मेरे सपनों के सौदागर दिल तो  तुम्हे देखने के पहले ही दे चुकी हूँ अब अगर जान भी माँगोगे  तो दे दूँगी...

तुम

तुम  मेरी ज़िन्दगी में अभी तक तो नहीं आये किन्तु ख्वाबो ,खयालोमें मैंने तुम्हे  महेसूस   किया है ,तुमसे बातें की है। वैसे भी मै  इसके सिवा  और कुछ कर भीं तो  नहीं सकती।      तुम मेरे लिए कितने अहेम  हो ये तो सिर्फ मै ,मै  ही जानती हूँ क्योंकि बहुत तकलीफों  का सामना करके मै  तुम तक पहुँच सकी हूँ। इसके लिए मुझे मेरी सोचने बड़ा हौसला दिया है। हाँ , ये सच है। मैंने मेरी कल्पनाओमें,कविताओमें तुम्हे खोजा , पाया  और  सपनो के मंदिर में  बिठा भी लिया  ! तुम्हारी तस्वीर को मेरे मनमंदिरमें  अंकित कर दिया !      मै  तुमसे एक बात  की  माफ़ी चाहती हूँ कि  तुम्हारी इजाजत के बगैर मैंने तुम्हे ख्वाबो में ढूँढा ,तुमसे बातें की  और सुहाने सपने भी सजाये ! क्या करूँ ? ये दुनिया सचमुचमें तो मुझे तुम्हारा या किसीका  भी हमसफ़र बनने  नहीं देगी इसीलिए ख्वाबों में ही मै  अपनी  आरजु  के महल सजाती  हूँ।  इस दुनिया में म...