कर ले तू कुछ कर ले तू , बढ़ ले तू आगे बढ़ ले तू ! खुद के अंदर झांक ले तू , क्या है तू क्या चाहता है तू ! अपने अंदर जोश को भर ले , अपना हर एक काम मन से कर ले ! कर ले तू कुछ कर ले तू , बढ़ ले तू आगे बढ़ ले तू ! तुजमे है हिम्मत कर सकेगा तू , तुजमे है ताकत लड़ सकेगा तू ! तुजमे है कुछ करने की चाह , बन सकेगा तू ! कर ले तू कुछ कर ले तू , बढ़ ले तू आगे बढ़ ले तू ! तू ही है गाँधी तू ही है कलाम , तुजमे ही छिपा है भारत का नवनिर्माण ! आगे मंजिल है ऊपर है खुला आसमान, जो चाहे कर ...
'नारी 'शब्द शक्ति का प्रतीक है ,और नारी को अपने जीवन में कई रूप लेने पड़ते है और वह ये सभी रूप अच्छी तरह से निभाती है। नारी से ही ये संसार चक्र आगे बढ़ता है। नारी ईश्वर का वरदान है ,जो हमें महानता का ज्ञान देती है। अगर नारी न होती तो कुछ भी न होता। प्यार और बलिदान का दूसरा रूप 'नारी' है। नारी जब पुत्री के रूप में जन्म लेती है ,तो माता पिता के जीवनमे खुशियाँ भर देती है। अपनी चहक से घर आँगन को महका देती है। जब विदा होकर ससुराल जाती है तो वहाँ पर भी सबको सहजतासे अपना लेती है। अपना घर-बार, माता -पिता सबको भुलाकर सास ससुर को ही अपने माता पिता का दर्जा देती है और गृहलक्ष्मी बनकर अपने कर्त्तव्य का पालन करती है। पत्नी के रूपमे वह पति को एवं उसके परिवार के सदस्योंको ,उनके गुण -दोषो सहित अपनाती है। उनकी पसंद -नापसंद का ख्याल रखती है। नारी में ही वह शक्ति है जो हर नए रूप में अपनेआपको आसानी से ढाल सकती है। नारी का सर्वश्रेष्ठ रूप ''मातृत्व'' का है। नौ मह...
उस पुरानी हवेली में कई राज दफन थे, थोड़े सच्चे तो थोड़े बने बनाए किस्से थे । डरते थे सब वहां जाने के लिए क्योंकि रहती थी वहां एक भूतनी डराने के लिए... बाहर से जितनी ही आकर्षक थी वह हवेली, अंदर से उतनी ही अकेली पड़ गई थी वह । तरस गई थी वह देखने इंसान का मुखड़ा, कहां जाए किसे सुनाये वह अपना दुखड़ा.... भूतनी बूतनी नहीं थी वहां... थी वह एक अबला, जिसने गुंडों से बचने लिया था वहां आसरा । लोगों की कहानियों को भूतनी बनकर उसने सच कर दिया, अपने सच्चे अस्तित्व को उसने उस हवेली में दफन कर दिया ...!!!
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