कर ले तू कुछ कर ले तू , बढ़ ले तू आगे बढ़ ले तू ! खुद के अंदर झांक ले तू , क्या है तू क्या चाहता है तू ! अपने अंदर जोश को भर ले , अपना हर एक काम मन से कर ले ! कर ले तू कुछ कर ले तू , बढ़ ले तू आगे बढ़ ले तू ! तुजमे है हिम्मत कर सकेगा तू , तुजमे है ताकत लड़ सकेगा तू ! तुजमे है कुछ करने की चाह , बन सकेगा तू ! कर ले तू कुछ कर ले तू , बढ़ ले तू आगे बढ़ ले तू ! तू ही है गाँधी तू ही है कलाम , तुजमे ही छिपा है भारत का नवनिर्माण ! आगे मंजिल है ऊपर है खुला आसमान, जो चाहे कर ...
Why you are so good that i can't wait to see you ? why your beautiful nature draws me towards you everyday? why i am always surrounded by your thoughts and your talks ? why your memories force me to fascinate only about you ? tell me , Dear , why this happens ?
'नारी 'शब्द शक्ति का प्रतीक है ,और नारी को अपने जीवन में कई रूप लेने पड़ते है और वह ये सभी रूप अच्छी तरह से निभाती है। नारी से ही ये संसार चक्र आगे बढ़ता है। नारी ईश्वर का वरदान है ,जो हमें महानता का ज्ञान देती है। अगर नारी न होती तो कुछ भी न होता। प्यार और बलिदान का दूसरा रूप 'नारी' है। नारी जब पुत्री के रूप में जन्म लेती है ,तो माता पिता के जीवनमे खुशियाँ भर देती है। अपनी चहक से घर आँगन को महका देती है। जब विदा होकर ससुराल जाती है तो वहाँ पर भी सबको सहजतासे अपना लेती है। अपना घर-बार, माता -पिता सबको भुलाकर सास ससुर को ही अपने माता पिता का दर्जा देती है और गृहलक्ष्मी बनकर अपने कर्त्तव्य का पालन करती है। पत्नी के रूपमे वह पति को एवं उसके परिवार के सदस्योंको ,उनके गुण -दोषो सहित अपनाती है। उनकी पसंद -नापसंद का ख्याल रखती है। नारी में ही वह शक्ति है जो हर नए रूप में अपनेआपको आसानी से ढाल सकती है। नारी का सर्वश्रेष्ठ रूप ''मातृत्व'' का है। नौ मह...
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