दिलने मान लिया है या तो सबने मुझसे ये मनवा लिया है कि तुम हो ! यहीं कहीं-----! इसीलिए तो ये दीवाना दिल तुम्हे कोई आशिक़ के रूप में ढूँढ रहा है कि कभी तो धीरे धीरे से तुम मेरी ज़िन्दगीमें आओगे ,दिल को चुराकर मनमें समाओगे !तब बहारों से मै कहूँगी कि बहारों फूल बरसाओ,मेरा महबूब आया है। जब तुम मुझे पहलीबार मिलोगे तो मै यही गाऊँगी कि कौन हो तुम जो दिल में समाए जाते हो ,अभी से तो ये धड़कन मेरे दिलकी तुमसे ये कहती है ---!कि तुम क्या मिले जानेजाँ , प्यार ज़िन्दगी से हो गया ! फिलहाल तो लाखो है निगाहोंमें ,ज़िन्दगी की राहोंमें -----पर फिर भी किसी हसींन यार की तलाश है। क्या तुम ये नहीं मानते हो ?'सांसो की जरुरत है जैसे जिंदगी के लिए ! सागर किनारे मेरा दिल यही गा रहा है कि ''तू जो नहीं तो मेरा कोई नहीं है !'' ओ मेरे सपनों के सौदागर दिल तो तुम्हे देखने के पहले ही दे चुकी हूँ अब अगर जान भी माँगोगे तो दे दूँगी...
कर ले तू कुछ कर ले तू , बढ़ ले तू आगे बढ़ ले तू ! खुद के अंदर झांक ले तू , क्या है तू क्या चाहता है तू ! अपने अंदर जोश को भर ले , अपना हर एक काम मन से कर ले ! कर ले तू कुछ कर ले तू , बढ़ ले तू आगे बढ़ ले तू ! तुजमे है हिम्मत कर सकेगा तू , तुजमे है ताकत लड़ सकेगा तू ! तुजमे है कुछ करने की चाह , बन सकेगा तू ! कर ले तू कुछ कर ले तू , बढ़ ले तू आगे बढ़ ले तू ! तू ही है गाँधी तू ही है कलाम , तुजमे ही छिपा है भारत का नवनिर्माण ! आगे मंजिल है ऊपर है खुला आसमान, जो चाहे कर ...
'नारी 'शब्द शक्ति का प्रतीक है ,और नारी को अपने जीवन में कई रूप लेने पड़ते है और वह ये सभी रूप अच्छी तरह से निभाती है। नारी से ही ये संसार चक्र आगे बढ़ता है। नारी ईश्वर का वरदान है ,जो हमें महानता का ज्ञान देती है। अगर नारी न होती तो कुछ भी न होता। प्यार और बलिदान का दूसरा रूप 'नारी' है। नारी जब पुत्री के रूप में जन्म लेती है ,तो माता पिता के जीवनमे खुशियाँ भर देती है। अपनी चहक से घर आँगन को महका देती है। जब विदा होकर ससुराल जाती है तो वहाँ पर भी सबको सहजतासे अपना लेती है। अपना घर-बार, माता -पिता सबको भुलाकर सास ससुर को ही अपने माता पिता का दर्जा देती है और गृहलक्ष्मी बनकर अपने कर्त्तव्य का पालन करती है। पत्नी के रूपमे वह पति को एवं उसके परिवार के सदस्योंको ,उनके गुण -दोषो सहित अपनाती है। उनकी पसंद -नापसंद का ख्याल रखती है। नारी में ही वह शक्ति है जो हर नए रूप में अपनेआपको आसानी से ढाल सकती है। नारी का सर्वश्रेष्ठ रूप ''मातृत्व'' का है। नौ मह...
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