Wednesday, 21 November 2012

तुम

तुम  मेरी ज़िन्दगी में अभी तक तो नहीं आये किन्तु ख्वाबो ,खयालोमें मैंने तुम्हे  महेसूस   किया है ,तुमसे बातें की है। वैसे भी मै  इसके सिवा  और कुछ कर भीं तो  नहीं सकती।
     तुम मेरे लिए कितने अहेम  हो ये तो सिर्फ मै ,मै  ही जानती हूँ क्योंकि बहुत तकलीफों  का सामना करके मै  तुम तक पहुँच सकी हूँ। इसके लिए मुझे मेरी सोचने बड़ा हौसला दिया है। हाँ , ये सच है। मैंने मेरी कल्पनाओमें,कविताओमें तुम्हे खोजा , पाया  और  सपनो के मंदिर में  बिठा भी लिया  ! तुम्हारी तस्वीर को मेरे मनमंदिरमें  अंकित कर दिया !
     मै  तुमसे एक बात  की  माफ़ी चाहती हूँ कि  तुम्हारी इजाजत के बगैर मैंने तुम्हे ख्वाबो में ढूँढा ,तुमसे बातें की  और सुहाने सपने भी सजाये ! क्या करूँ ? ये दुनिया सचमुचमें तो मुझे तुम्हारा या किसीका  भी हमसफ़र बनने  नहीं देगी इसीलिए ख्वाबों में ही मै  अपनी  आरजु  के महल सजाती  हूँ।  इस दुनिया में मुझे किसीकी रोकटोक नहीं ,किसीका भय नहीं ! अब तो मै  अपनी इसी दुनिया में खुश हूँ। मेरे लिए इससे ज्यादा ख़ुशी की और क्या बात होगी कि  मेरे सपनों को मै  सपनों में ही सही पर सच्चा होते हुए देख तो लेती हूँ ! अब तो तुम ना  भी मिलो तो मुझे कोई गम न होगा। मैंने अपनेआपके साथ ,अपनी नाकाबिलियत  के साथ  समझौता  कर ही लिया है। सिर्फ इतना करना ,हो सके तो मुझे मेरी इस दुनिया से, तुम्हारी यादों से जुदा  न करना, कभी नहीं। मुझे ख्वाब में मिलते रहेना  और ये जालिम दुनिया में न सही मेरी प्यारीसी छोटीसी  मुहोब्बत की दुनिया में आना। कभी मुड़कर वापस न जाने के लिए !और मेरे प्यार की सौगात- तुम्हारे लिए लिखे मेरे खत ,मेरी रचनाओंको कुबूल करना ---मेरे पास मेरी प्यारकी दुनिया के अलावा  कुछ भी नहीं ,कुछ भी तो नहीं है !
    मेरी  इन सब पगली सी बातें सुनकर तुम्हे हंसी आ रही है ना ,मुझे तुम्हारी यही मुस्कान चाहिए। मेरी एक छोटी सी इल्तजा है मेरे प्रीतम ,मेरे होकर रहना !अगर तुमने मेरी ये ख्वाइश पूरी कर दी तो मै  समझूँगी  तुमने मुझे सब कुछ दे दिया !अपनेआपको मै  सबसे ज्यादा खुशकिस्मत समझूँगी।
     किस हक़ से मैंने तुम्हे ये सब कहा है अब तो तुम समज ही गए होंगे ! काश के तुम भी मुझसे ये सब कहे सको ,कहे सको के तुम भी मेरी ख़ुशी चाहते हो--- कहे दो  कुछ तो कहो -------!!!
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