Saturday, 17 November 2012

'तू ही तू'

जब भी तेरी याद आती है
मैं अपनी दुनिया ही भूल जाती हूँ।
      जब भी  तू मिलती  है ,
      मैं  कुछ कहना ही भूल जाती हूँ।
जब भी तू नहीं आती है ,
मैं  हँसना  ही भूल जाती हूँ।
      तू मेरी ज़िन्दगी में आई बहार बनके !
      तेरे आने से  पहले मेरे पास ,
सोचने के लिए कुछ न था !
और अब ---- अब !
तू ही तू छायी  है।

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