Saturday, 17 November 2012

'मैं और मेरी तन्हाई'


ज़िन्दगी वीरानगीओमें
कोई सहारा नजर आया था।
सोचा था जिसके सहारे
इस सफर का रास्ता आराम से कट जायेगा ,
और मेरा दामन  हमेशा के लिए खुशियों से भर जायेगा
पर ऐसा न हो सका ,
जिस दुनिया की मैंने कल्पना की थी ,
वो दुनिया बसने  के पहले ही उजड़ गई।
जिन ख्वाबों को मैंने महसूस किए  थे ,
वो सारे ख्वाब टूट गए।
और मेरी कल्पना सिर्फ एक भ्रम  बनकर  रहे गई।
और अब मेरे साथ है
सिर्फ मेरी ये तन्हाई और उदासी !
मगर फिर भी ये सब
सच्चे मायने में मुझे जीना सीखा गई  है
मेरी ज़िन्दगी की उदास राहों में
मुझे
चलना सीखा गई  है !

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