Saturday, 17 November 2012

'क्या यही प्यार है?'

ये दिल की लगी नहीं तो और क्या है ?
की तुम मुझे बार-बार याद आते हो।
हज़ारों सपने सजाकर चले जाते हो
मेरी दुनिया में आकर बगैर इज़ाज़त लौट जाते हो।
       ये प्यार नहीं तो और क्या है ?
       की तुम नहीं तो मुझे  करार  नहीं
       जैसे मेरे दिल में धड़कन ही नहीं
       तुम्हारे सिवा  मनमें और  कोई मूरत ही नहीं
ये मुहोब्बत नहीं तो और क्या है ?
की तुम ही तुम छाए  रहते हो
मनमे मेरे समाए रहते हो।
ऐसा लगता है कि -तुम हो तो ये जहाँ है ,
वर्ना  हम इस दुनिया में क्या है ?
        ये प्यार का इज़हार नहीं तो और क्या है ?
        कि  तुम यूँ ही मुझे बुलाया करते हो ,
        दिल का हाल बताया करते हो
        कुछ न कहते हुआ भी सब कुछ कहते रहते हो
        बोलो क्या ये प्यार नहीं है ?

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